परियोजना

दिल्ली में अलग-अलग तरह की रिहायशें हैं जो औपचारिकता, कानूनी दर्जे और भूमि अधिकार सम्बन्धी नियम के आधार पर परिभाषित की जाती हैं. सिटीज़ ऑफ़ डेल्ही शहरी विकास पर एक बड़ी परियोजना का एक हिस्सा है जो बहुत बारीकी से मूलभूत सुविधाओं प्राप्त करने की प्रक्रिया किस प्रकार अलग-अलग तरह रिहायशों में अलग रहती है, को लिखित रूप से दर्ज करने का प्रयास करता है . प्रणीति अनुसन्धान संस्थान के अनुसंधानकर्ताओं की एक टीम के द्वारा किया जाने वाला यह अनुसन्धान, यह आंकने का प्रयास करता है कि इस शहर के निवासी किस प्रकार अपने चुने हुए प्रतिनीधि, सरकारी संस्थाओं और अन्य प्रतिनिधियों के माध्यम से सार्वजानिक सुविधाएं प्राप्त करने का प्रयास करते हैं.

 

तीन तरह की रिपोर्टों के माध्यम से, यह परियोजना एक विस्तृत चित्र प्रस्तुत करने की कोशिश करेगी कि यह शहर किस प्रकार प्रशासित होता है, और खासकर किस प्रकार यह गरीबों को प्रभावित करता है. इस प्रयास में सबसे पहले झुग्गी-झोपडी झुण्ड(क्लस्टर), अनाधिकृत कॉलोनिययों और पुनर्वास कॉलोनियों पर बहुत ध्यान से चुनी हुई केस-स्टडीज का एक समूह हैं. प्रत्येक केस किसी रिहायश के वर्तमान दर्जे और इतिहास, सुविधाओं के स्तर और गुणवत्ता, और किस प्रकार समुदाय सरकारी एजेंसियों, अपने चुने हुए प्रतिन्धियों और अन्य तत्वों से मिलकर काम करता है, इसका लेखा-जोखा देता है. केस-स्टडीज़ का एक दूसरा समूह उन विभिन्न प्रक्रियाओं को समझने की कोशिश करता है जिनके माध्यम से संचालक संस्था निवासियों के साथ आदान-प्रदान करती है. रिपोर्टों का यह समूह, उदाहरण के लिए, अनाधिकृत कॉलोनियों के नियमन की प्रक्रिया या झुग्गी-झोपड़ी विस्थापन के प्रबंधन पर लागू होने वाले कानूनी और निति सम्बन्धी निर्देशों का आंकलन करता है. इसके साथ-साथ यह भी समझने का प्रयास करता है की वास्तव में ये हस्तक्षेप ज़मीनी स्तर पर कुछ चुनिन्दा साइट्स पर कैसे काम करते हैं. परियोजना में रिपोर्टों का एक समूह कुछ चुनिन्दा सरकारी एजेंसियों पर ध्यान केन्द्रित करता है. यह रिपोर्टें डीडीए(दिल्ली विकास प्राधिकरण) और डीयुएसआईबी (दिल्ली शहरी आश्रय सुधर बोर्ड) जैसी एजेंसियों के कानूनी ढांचे, संस्थागत ढांचे, नीतियाँ और गतिविधियों को दर्ज करती हैं. सभी रिपोर्टें पूरी होते ही सार्वजनिक की जाएँगी.

 

सिटीज़ ऑफ़ डेल्ही को आर्थिक सहायता ब्राउन विश्विद्यालय और भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसन्धान परिषद् (आईसीएसएसआर) से प्राप्त हुई है.

रिसर्च टीम के सदस्य

सुभद्रा बांदा

रिसर्चर

पैट्रिक हेलर

सह निर्देशक

बिजेंद्र झा

रिसर्चर

ईशा कुंदूरी

रिसर्चर

बेन मेँडेलकर्न

संपादक

पार्था मुखोपाध्याय

सह निर्देशक

राम प्रवेश शाही

रिसर्चर

सोनल शर्मा

रिसर्चर

शहाना शेख

रिसर्चर

पर्सिस तारापोरवाला

रिसर्चर

पास्ट कॉंट्रिब्यूटर्स:

डेविड एडलर

एक्सटर्नल रिसर्चर

वर्षा भाइक

रिसर्चर